Adhyāya 14: Sudēṣṇā Sends Sairandhrī to Kīcaka’s House (सुदेष्णा–सैरन्ध्री–कीचक संवादः)
स्वादून्यमृतकल्पानि पेयानि विविधानि च । पिबमाना मनोज्ञानि रममाणा यथासुखम्,“अमृतके समान स्वादिष्ट और मनोहर भाँति-भाँतिके पेय रसोंका पान करती हुई तुम्हें जैसे सुख मिले, उसी प्रकार रमण करो
svādūny amṛtakalpāni peyāni vividhāni ca | pibamānā manojñāni ramamāṇā yathāsukham ||
अमृत के समान स्वादिष्ट, मनोहर और नाना प्रकार के पेय रसों का पान करती हुई, जैसा सुख मिले वैसा ही रमण करो।
वैशम्पायन उवाच