इन्द्रवृत्रयुद्धवर्णनम्
Indra–Vṛtra Conflict and the Adversaries’ Tapas-Targeting Counsel
इदमारोपितं ब्रह्मन् किमन्यत् करवाणि ते । तस्य रामो ददौ दिव्यं जामदग्न्यो महात्मन: । शरमाकर्णदेशान्तमयमाकृष्यतामिति
idam āropitaṁ brahman kim anyat karavāṇi te | tasya rāmo dadau divyaṁ jāmadagnyo mahātmanaḥ | śaram ākārṇadeśāntam ayam ākṛṣyatām iti
“ब्रह्मन्! यह तो चढ़ा दिया गया; अब तुम्हारे लिए और क्या करूँ?” तब महात्मा जामदग्न्य राम ने उसे एक दिव्य बाण देते हुए कहा—“इसे कान तक खींचो (पूर्ण प्रत्याकर्षण करो)।”
लोमश उवाच