Avanti–Narmadā–Puṣkara Tīrtha-Kathana (धौम्यकथितं तीर्थवर्णनम्)
पूर्व प्राचीं दिशं राजन् राजर्षिगणसेविताम् । रम्यां ते कथयिष्यामि युधिषछ्िर यथास्मृति,“महाराज युधिष्ठिर! मैं अपनी स्मरणशक्तिके अनुसार सबसे पहले राजर्षिगणोंद्वारा सेवित रमणीय प्राची दिशाका वर्णन करूँगा
महाराज युधिष्ठिर! मैं अपनी स्मरण-शक्ति के अनुसार सबसे पहले राजर्षिगणों द्वारा सेवित उस रमणीय प्राची दिशा का वर्णन करूँगा।
वैशम्पायन उवाच