युधिष्ठिरस्य अर्जुनप्रेषण-युक्तिवर्णनम् | Yudhiṣṭhira’s Rationale for Sending Arjuna and Request to Dhaumya
सिन्धोश्व प्रभवं गत्वा सिद्धगन्धर्वसेवितम् । तत्रोष्य रजनी: पज्च विन्देद् बहुसुवर्णकम्,सिंधुके उदगमस्थानमें जो सिद्ध-गन्धर्वोद्वारा सेवित है, जाकर पाँच रात उपवास करनेसे प्रचुर सुवर्णराशिकी प्राप्ति होती है
Sindhoś ca prabhavaṁ gatvā siddhagandharvasevitam | tatroṣya rajanīḥ pañca vinded bahusuvarṇakam ||
सिन्धु के उद्गम-स्थान पर, जो सिद्धों और गन्धर्वों से सेवित पवित्र तीर्थ है, जाकर जो पाँच रात्रियाँ नियमपूर्वक निवास करता है, वह प्रचुर सुवर्ण प्राप्त करता है।
घुलस्त्य उवाच