Tīrtha-yātrā: Phalaśruti and Sacred Geography from Lohitya to Prayāga
Pulastya’s Instruction
तत्र स्नात्वा नरो राजन् स्वर्गलोकं प्रपद्यते । आपगायां नरः स्नात्वा अर्चयित्वा महेश्वरम्
tatra snātvā naro rājan svargalokaṃ prapadyate | āpagāyāṃ naraḥ snātvā arcayitvā maheśvaram |
हे राजन्! वहाँ स्नान करने वाला मनुष्य स्वर्गलोक को प्राप्त होता है। जो पुरुष उस आपगा (नदी) में स्नान करके महेश्वर की अर्चना करता है, वह उस पुण्यकर्म का फल पाता है।
घुलस्त्य उवाच