Tīrtha-yātrā: Phalaśruti and Sacred Geography from Lohitya to Prayāga
Pulastya’s Instruction
ततो गच्छेत धर्मज्ञ विष्णो: स्थानमनुत्तमम् | सतत नाम राजेन्द्र यत्र संनिहितो हरि:,धर्मज्ञ राजेन्द्र! तत्पश्चात् भगवान् विष्णुके परम उत्तम सतत नामक तीर्थस्थानमें जाय, जहाँ श्रीहरि सदा निवास करते हैं
tato gacchet dharmajña viṣṇoḥ sthānam anuttamam | satataṃ nāma rājendra yatra saṃnihito hariḥ ||
हे धर्मज्ञ राजेन्द्र! तत्पश्चात् विष्णु के परम अनुत्तम स्थान—‘सतत’ नामक तीर्थ—में जाना चाहिए, जहाँ श्रीहरि सदा संनिहित रहते हैं।
घुलस्त्य उवाच