Kāmyake Arjuna-viyogaḥ — The Pandavas’ despondency in Kāmyaka during Arjuna’s absence
हि आय ० (0) है 2 एकोनाशीतितमो< ध्याय: राजा नलके आख्यानके कीर्तनका महत्त्व, बृहदश्व मुनिका युधिषछ्तटिरको आश्वासन देना तथा द्यूतविद्या और अश्वविद्याका रहस्य बताकर जाना बृहदश्च उवाच प्रशान्ते तु पुरे हृष्टे सम्प्रवृत्ते महोत्सवे । महत्या सेनया राजा दमयन्तीमुपानयत्,बृहदश्च मुनि कहते हैं--युधिष्ठिर! जब नगरमें शान्ति छा गयी और सब लोग प्रसन्न हो गये, सर्वत्र महान् उत्सव होने लगा, उस समय राजा नल विशाल सेनाके साथ जाकर दमयन्तीको विदर्भदेशसे बुला लाये
bṛhadaśva uvāca | praśānte tu pure hṛṣṭe sampravṛtte mahotsave | mahatyā senayā rājā damayantīm upānayat |
बृहदश्व बोले—युधिष्ठिर! जब नगर में शान्ति छा गई, प्रजा हर्षित हो उठी और सर्वत्र महान् उत्सव होने लगा, तब राजा नल विशाल सेना के साथ विदर्भ देश गया और दमयन्ती को वहाँ से ले आया।
बृहदश्च उवाच