Akṣa-hṛdaya-dāna and Phalāśruti of the Nalopākhyāna (अक्षहृदयदानम् / नलोपाख्यान-फलश्रुतिः)
वैदर्भी न त्वया शक््या राजापसद वीक्षितुम् | तस्यास्त्वं सपरीवारो मूढ दासत्वमागत:,पुष्करको परास्त करके राजा नलने हँसते हुए उससे कहा--“नृपाधम! अब यह शान्त और अकण्टक सारा राज्य मेरे अधिकारमें आ गया। विदर्भकुमारी दमयन्तीकी ओर तू आँख उठाकर देख भी नहीं सकता। मूर्ख! आजसे तू परिवारसहित दमयन्तीका दास हो गया
bṛhadaśva uvāca | vaidarbhī na tvayā śakyā rājāpasada vīkṣitum | tasyās tvaṃ saparīvāro mūḍha dāsatvam āgataḥ |
हे राजापसद! तू विदर्भकुमारी की ओर आँख उठाकर देखने योग्य भी नहीं है। मूढ़! अब तू अपने परिजन-परिवार सहित उसी का दास हो गया है।
बृहदश्चव उवाच