नलस्य पुष्करजयो द्यूते
Nala’s Victory over Puṣkara in the Dice-Game
किंचित् तु नापराधं ते कृतवानस्मि नैषध । अज्ञातवासे वसतो मद्गृहे वसुधाधिप,(और पुनः कहा--) “नैषध! भूपालशिरोमणे! आप मेरे घरपर जब अज्ञातवासकी अवस्थामें रहते थे, उस समय मैंने आपका कोई अपराध तो नहीं किया है?
Bṛhadaśva uvāca: kiñcit tu nāparādhaṃ te kṛtavān asmi naiṣadha | ajñātavāse vasato madgṛhe vasudhādhipa ||
बृहदश्व बोले—“हे नैषध, वसुधाधिप! जब आप मेरे घर में अज्ञातवास कर रहे थे, तब मैंने आपके प्रति कोई भी, किंचित् भी, अपराध तो नहीं किया?”
बृहृदश्च उवाच