Adhyāya 73: Damayantī’s Investigation of Bāhuka
Keśinī’s Observations
अऑरड..2 #23. | हि 7 मु त्रिसप्ततितमो< ध्याय: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत बृहदश्चव उवाच ततो विदर्भान् सम्प्राप्तं सायाह्ले सत्यविक्रमम् । ऋतुपर्ण जना राज्ञे भीमाय प्रत्यवेदयन्,बृहदश्व मुनि कहते हैं--युधिष्ठिर! तदनन्तर शाम होते-होते सत्यपराक्रमी राजा ऋतुपर्ण विदर्भराज्यमें जा पहुँचे। लोगोंने राजा भीमको इस बातकी सूचना दी
Bṛhadaśva uvāca | tato vidarbhān samprāptaṃ sāyāhle satyavikramam | ṛtuparṇaṃ janā rājñe bhīmāya pratyavedayan ||
बृहदश्व बोले—“युधिष्ठिर! तत्पश्चात् संध्या के समय सत्यपराक्रमी राजा ऋतुपर्ण विदर्भदेश में आ पहुँचे। लोगों ने यह समाचार राजा भीम को जाकर दिया।”
बृहदश्चव उवाच