Parṇāda’s Report; Bāhuka’s Counsel; Damayantī’s Strategic Svayaṃvara Message (अध्याय ६८)
बृहदश्च उवाच एवं विमृश्य विविधै: कारणैर्लक्षणैश्न ताम् । उपागम्य ततो भैमीं सुदेवो ब्राह्म॒णोडब्रवीत्,बृहदश्वच मुनि कहते हैं--युधिष्ठिर! इस प्रकार भाँति-भाँतिके कारणों और लक्षणोंसे दमयन्तीको पहचानकर और अपने कर्तव्यके विषयमें विचार करके सुदेव ब्राह्मण उसके समीप गये और इस प्रकार बोले--'विदर्भराजकुमारी! मैं तुम्हारे भाईका प्रिय सखा सुदेव हूँ। महाराज भीमकी आज्ञासे तुम्हारी खोज करनेके लिये यहाँ आया हूँ
Bṛhadaśva uvāca: evaṁ vimṛśya vividhaiḥ kāraṇair lakṣaṇaiś ca tāṁ upāgamya tato bhaimīṁ Sudevo brāhmaṇo ’bravīt.
बृहदश्व मुनि बोले—युधिष्ठिर! इस प्रकार अनेक कारणों और लक्षणों से विचार कर दमयन्ती को पहचानकर, सुदेव ब्राह्मण उसके पास गया और बोला।
बृहदश्च उवाच