Sudeva Identifies Damayantī in Cedi (सुदेवेन दमयन्ती-परिचयः)
देशात् तस्माद् विनिष्क्रम्प शोचन्ते वैशसं कृतम् भ्रातरं पितरं पुत्रं सखायं च नराधिप,तदनन्तर दूसरा दिन प्रारम्भ होनेपर मरनेसे बचे हुए लोग उस स्थानसे निकलकर उस विकट संहारके लिये शोक करने लगे। राजन्! कोई भाईके लिये दुःखी था, कोई पिताके लिये; किसीको पुत्रका शोक था और किसीको मित्रका
bṛhadaśva uvāca | deśāt tasmād viniṣkramya śocante vaiśasaṁ kṛtam | bhrātaraṁ pitaraṁ putraṁ sakhāyaṁ ca narādhipa ||
उस स्थान से निकलकर बचे हुए लोग उस भयंकर संहार पर विलाप करने लगे। हे नराधिप! कोई भाई के लिए शोक करता था, कोई पिता के लिए; किसी को पुत्र का दुःख था, और किसी को मित्र का।
बृहदश्चव उवाच