Lokapāla-samāgamaḥ—Arjuna Receives Astras from the World-Guardians
Book 3, Chapter 42
तपसा च जित स्वर्ग सम्पेतु: शतसड्घश: । गन्धर्वाणां सहस्राणि सूर्यज्वलिततेजसाम्,सैकड़ों झुंड-के-झुंड तपस्वी पुरुष स्वर्गमें जा रहे थे, जिन्होंने तपस्याद्वारा उसपर विजय पायी थी। सूर्यके समान प्रकाशमान सहस्रों गन्धर्वों, गुह्कों, ऋषियों तथा अप्सराओंके समूहोंको और उनके स्वतः प्रकाशित होनेवाले लोकोंको देखकर अर्जुनको बड़ा आश्चर्य होता था
tapasā ca jita-svargaṃ sampetuḥ śataśaḥ gaṇaśaḥ | gandharvāṇāṃ sahasrāṇi sūrya-jvalita-tejasām |
तपस्या द्वारा स्वर्ग को जीत चुके तपस्वी पुरुषों के सैकड़ों दल-के-दल वहाँ जा रहे थे। और सूर्य के समान ज्वलित तेज वाले सहस्रों गन्धर्व भी थे।
वैशम्पायन उवाच