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Shloka 4

Śiva Grants the Pāśupata Astra (Pāśupata-Śastra Upadeśa) | शिवेन पाशुपतास्त्रदानम्

कृतार्थ चावगच्छामि परमात्मानमाहवे । शत्रृंश्न विजितान्‌ सर्वान्‌ निर्वृत्तं च प्रयोजनम्‌,आज मैं अपने-आपको परम कृतार्थ मानता हूँ, साथ ही यह विश्वास करता हूँ कि महासमरमें अपने समस्त शत्रुओंपर विजय प्राप्त करूँगा। अब मेरा अभीष्ट प्रयोजन सिद्ध हो गया

आज मैं अपने-आपको परम कृतार्थ मानता हूँ; और यह भी निश्चय जानता हूँ कि महासमर में अपने समस्त शत्रुओं पर विजय प्राप्त करूँगा। अब मेरा अभीष्ट प्रयोजन सिद्ध हो गया।

वैशम्पायन उवाच