Arjuna’s Himalayan Departure and the Commencement of Severe Tapas
Janamejaya’s Inquiry; Sages Approach Śiva
मयैष प्रार्थित: पूर्वमिन्द्रकीलसमप्रभ: । अनादृत्य च तद् वाक्यं प्रजहाराथ फाल्गुन:,और कहा--*इन्द्रकील पर्वतके समान कान्तिवाले इस सूअरको पहलेसे ही मैंने अपना लक्ष्य बना रखा है, अतः तुम न मारो।' परंतु अर्जुनने किरातके वचनकी अवहेलना करके उसपर प्रहार कर ही दिया
अर्जुन ने कहा—‘इन्द्रकील पर्वत के समान कान्तिवाले इस सूअर को मैंने पहले ही अपना लक्ष्य बना रखा है; इसलिए तुम इसे मत मारो।’ परंतु किरात के वचन की अवहेलना करके फाल्गुन ने उस पर प्रहार कर ही दिया।
वैशम्पायन उवाच