अर्जुनस्य इन्द्रकीलगमनम् तथा शक्रसाक्षात्कारः
Arjuna’s journey to Indrakīla and encounter with Indra
मनोहरवनोपेतास्तस्मिन्नतिरथो<र्जुन: । पुण्यशीतामलजला: पश्यन् प्रीतमनाभवत्,उन नदियोंके आस-पास मनोहर वनश्रेणी सुशोभित होती थी। हिमालयके उस शिखरपर पवित्र, शीतल और निर्मल जलसे भरी हुई उन सुन्दर सरिताओंका दर्शन करके अतिरथी अर्जुनका मन प्रसन्नतासे खिल उठा
उस प्रदेश में नदियों के चारों ओर मनोहर वन-श्रेणियाँ शोभित थीं। हिमालय के उस शिखर-प्रदेश में पवित्र, शीतल और निर्मल जल से भरी उन सुन्दर सरिताओं का दर्शन करके अतिरथी अर्जुन का मन प्रसन्नता से खिल उठा।
वैशम्पायन उवाच