Vyāsa’s Counsel to Yudhiṣṭhira: Pratismṛti-vidyā, Arjuna’s Aśtra-Quest, and the Move to Kāmyaka
यदा द्रक्ष्यसि भूतेशं तयक्षं शूलधरं शिवम् | तदा दातास्मि ते तात दिव्यान्यस्त्राणि सर्वश:,“तात! जब तुम्हें तीन नेत्रोंसे विभूषित त्रिशूलधारी भूतनाथ भगवान् शिवका दर्शन होगा, तब मैं तुम्हें सम्पूर्ण दिव्यास्त्र प्रदान करूँगा
yadā drakṣyasi bhūteśaṃ tryakṣaṃ śūladharaṃ śivam | tadā dātāsmi te tāta divyāny astrāṇi sarvaśaḥ ||
तात! जब तुम त्रिनेत्र, त्रिशूलधारी भूतनाथ भगवान् शिव का दर्शन करोगे, तब मैं तुम्हें समस्त दिव्यास्त्र पूर्ण रूप से प्रदान करूँगा।
वैशम्पायन उवाच