Vyāsa’s Counsel to Yudhiṣṭhira: Pratismṛti-vidyā, Arjuna’s Aśtra-Quest, and the Move to Kāmyaka
युधिछिर उवाच भीष्मे द्रोणे कृपे कर्णे द्रोणपुत्रे च भारत । धरनुर्वेदश्चतुष्पाद एतेष्वद्य प्रतिष्ठित:,युधिष्ठिरने कहा--भारत! आजकल पितामह भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण और अश्वत्थामा--इन सबमें चारों पादोंसे युक्त सम्पूर्ण धनुर्वेद प्रतिष्ठित है
युधिष्ठिर ने कहा—हे भारत! आज पितामह भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण और द्रोणपुत्र अश्वत्थामा—इनमें चारों पादों से युक्त सम्पूर्ण धनुर्वेद प्रतिष्ठित है।
युधिछिर उवाच