Yudhiṣṭhira’s Reproof and Vow-Logic: On Dice-Deception, Exile Terms, and the Governance of Anger
Adhyāya 35
हत्वा वै पुरुषो राजन् निकर्तारमरिंदम । अद्वाय नरकं गच्छेत् स्वर्गंणास्य स सम्मित:,शत्रुदमन नरेश! यदि मनुष्य अपनेको धोखा देनेवाले शत्रुका वध करके तुरंत ही नरकमें पड़ जाय तो उसके लिये वह नरक भी स्वर्गके तुल्य है
hatvā vai puruṣo rājan nikartāram arindama | advayā narakaṃ gacchet svargaṃṇāsya sa sammitāḥ ||
शत्रुदमन नरेश! यदि कोई पुरुष अपने को छलने वाले शत्रु का वध करके तुरंत नरक में भी जा पड़े, तो उसके लिए वह नरक भी स्वर्ग के तुल्य ही माना जाएगा।
भीमसेन उवाच