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Shloka 59

Dharma-śaṅkā-nivāraṇa: Yudhiṣṭhira’s Response on Karma-Phala and Trust in Dharma

एवं संस्थितिका सिद्धिरियं लोकस्य भारत | तत्र सिद्धिर्गति: प्रोक्ता कालावस्थाविभागत:,भारत! लोकको इसी प्रकार कार्यसिद्धि प्राप्त होती है--कार्यसिद्धिकी यही व्यवस्था है। काल और अवस्थाके विभागके अनुसार शत्रुकी दुर्बलताके अन्वेषणका प्रयत्न ही सिद्धिका मूल कारण है

हे भारत! लोक में कार्यसिद्धि की व्यवस्था इसी प्रकार स्थित है। काल और अवस्था के विभाग के अनुसार शत्रु की दुर्बलता का अन्वेषण करने का प्रयत्न ही सिद्धि का मूल कारण कहा गया है।

युधिछिर उवाच