तद् वसामो वयं छजन्नास्तदनुज्ञातुमर्हथ । सुयोधनश्व दुष्टात्मा कर्णश्न सहसौबल:,“अतः इस वर्ष हम छिपकर रहना चाहते हैं। इसके लिये आपलोग हमें आज्ञा दें। दुष्टात्मा दुर्योधन, कर्ण और शकुनि हमसे अत्यन्त वैर रखते हैं। वे स्वयं तो हमारा पता लगानेको उद्यत हैं ही, उन्होंने गुप्तचर भी लगा रखे हैं। अतः यदि उन्हें हमारे रहनेका पता चल जायगा, तो वे हमसे सम्बन्ध रखनेवाले पुरजनों तथा स्वजनोंके साथ भी विषम (बुरा) बर्ताव कर सकते हैं
tad vasāmo vayaṃ chajannās tad anu-jñātum arhatha | suyodhanaś ca duṣṭātmā karṇaś ca sahasaubalaḥ ||
“अतः इस वर्ष हम छिपकर रहना चाहते हैं; इसके लिए आप हमें अनुमति दें। दुष्टात्मा सुयोधन (दुर्योधन), कर्ण और सौबल (शकुनि) सहित हमसे घोर वैर रखते हैं।”
वैशम्पायन उवाच