सुखं प्रतिप्रबुद्धानामिन्द्रियाण्युपलक्षये । स भवान् सुहृदो5स्माकमथवा न: पिता भवान्,अब जीवित होनेपर भी इनकी इन्द्रियाँ सुखकी नींद सोकर उठे हुए पुरुषोंके समान स्वस्थ दिखायी देती हैं, अत: आप हमारे कोई सुहृद् हैं अथवा पिता?
sukhaṃ pratiprabuddhānām indriyāṇy upalakṣaye | sa bhavān suhṛdo 'smākam athavā naḥ pitā bhavān ||
मैं देखता हूँ कि इनके इन्द्रिय-बल सुखद निद्रा से जागे हुए पुरुषों के समान स्वस्थ और स्थिर हैं; इसलिए आप हमारे सुहृद् हैं—अथवा हमारे पिता के समान हैं।
युधिछ्िर उवाच