यक्ष उवाच को5हड्कार इति प्रोक्त: कश्न दम्भ: प्रकीर्तित: । कि तद् दैवं परं प्रोक्त कि तत् पैशुन्यमुच्यते,यक्षने पूछा--अहंकार किसे कहते हैं? दम्भ क्या कहलाता है? जिसे परम दैव कहते हैं, वह क्या है? और पैशुन्य किसका नाम है?
yakṣa uvāca: ko'haṅkāra iti proktaḥ? kaś ca dambhaḥ prakīrtitaḥ? ki tad daivaṃ paraṃ proktaṃ? ki tat paiśunyam ucyate?
यक्ष ने कहा—अहंकार किसे कहते हैं? दम्भ (दिखावटी धर्म-आडम्बर) क्या कहलाता है? जिसे परम दैव कहा गया है, वह क्या है? और पैशुन्य—दुष्ट चुगली/निन्दा—किसे कहते हैं?
यक्ष उवाच