युधिछिर उवाच मोहो हि धर्ममूढत्वं मानस्त्वात्माभिमानिता । धर्मनिष्क्रियता55लस्यं शोकस्त्वज्ञानमुच्यते,युधिष्ठिर बोले--धर्ममूढ़ता ही मोह है, आत्माभिमान ही मान है, धर्मका पालन न करना आलस्य है और अज्ञानको ही शोक कहते हैं
yudhiṣṭhira uvāca | moho hi dharmamūḍhatvaṃ mānas tv ātmābhimānitā | dharmanīṣkriyatā ālasyaṃ śokas tv ajñānam ucyate ||
युधिष्ठिर बोले—धर्म के विषय में मूढ़ता ही मोह है, आत्माभिमान ही मान है, धर्मानुसार कर्म न करना आलस्य है, और जिसे लोग शोक कहते हैं वह वास्तव में अज्ञान है।
युधिछिर उवाच