युधिष्ठिर बोले--दरिद्र पुरुष मरा हुआ है यानी मरे हुएके समान है, बिना राजाका राज्य मर जाता है यानी नष्ट हो जाता है, श्रोत्रिय ब्राह्मणके बिना श्राद्ध मृत हो जाता है और बिना दक्षिणाका यज्ञ नष्ट हो जाता है ।। यक्ष उवाच का दिक् किमुदकं प्रोक्त किमन्नं किं च वै विषम् | श्राद्धस्य कालमाख्याहि तत: पिब हरस्व च,यक्षने पूछा--दिशा क्या है? जल क्या है? अन्न क्या है? विष क्या है? और श्राद्धका समय क्या है? यह बताओ। इसके बाद जल पीओ और ले भी जाओ
yakṣa uvāca | dik kiṃ udakaṃ proktaṃ kim annaṃ kiṃ ca vai viṣam | śrāddhasya kālam ākhyāhi tataḥ piba harasva ca ||
यक्ष बोले— दिशा क्या है? जल क्या कहा गया है? अन्न क्या है और विष क्या है? श्राद्ध का समय भी बताओ; फिर जल पीओ और ले भी जाओ॥
यक्ष उवाच