यक्ष उवाच किंस्विदात्मा मनुष्यस्य किंस्विद् दैवकृत: सखा । उपजीवनं किंस्विदस्य किंस्विदस्य परायणम्
yakṣa uvāca kiṃsvid ātmā manuṣyasya kiṃsvid daivakṛtaḥ sakhā | upajīvanaṃ kiṃsvid asya kiṃsvid asya parāyaṇam |
यक्ष ने कहा—मनुष्य का अपना आत्मा क्या है? दैवकृत (भाग्य-निर्धारित) सखा कौन है? उसका उपजीवन (जीविका का साधन) क्या है? और उसका परम आश्रय, अंतिम शरण क्या है?
यक्ष उवाच