न शशाक यदा बाला प्रत्याख्यातुं तमोनुदम् । भीता शापात् ततो राजन् दध्यौ दीर्घमथान्तरम्,राजन्! जब वह बाला अन्धकारनाशक भगवान् सूर्यदेवको टाल न सकी, तब शापसे भयभीत हो दीर्घकालतक मन-ही-मन कुछ सोचने लगी
na śaśāka yadā bālā pratyākhyātuṃ tamonudam | bhītā śāpāt tato rājan dadhyau dīrgham athāntaram ||
राजन्! जब वह बाला अन्धकारनाशक सूर्यदेव को टाल न सकी, तब शाप के भय से वह दीर्घकाल तक मन-ही-मन विचार करती रही।
वैशम्पायन उवाच