बिभेमि न तथा मृत्योर्यथा बिभ्येडनृतादहम् । विशेषेण द्विजातीनां सर्वेषां सर्वदा सताम्
bibhemi na tathā mṛtyor yathā bibhyed anṛtād aham | viśeṣeṇa dvijātīnāṃ sarveṣāṃ sarvadā satām ||
कर्ण ने कहा—मैं मृत्यु से उतना नहीं डरता, जितना असत्य से डरता हूँ। विशेषतः सदा धर्मनिष्ठ समस्त द्विजों के सामने झूठ बोलने से मैं अत्यन्त भयभीत होता हूँ।
कर्ण उवाच