Sūrya-stava: Dhaumya’s Counsel and the Aṣṭaśata-nāma of Sūrya
भुक्तवत्सु च विप्रेषु भोजयित्वानुजानपि । शेषं विघससंतज्ञं तु पश्चाद् भुड्धक्ते युधिष्ठिर:,ब्राह्मणोंक भोजन कर लेनेपर अपने छोटे भाइयोंको भी भोजन करानेके पश्चात् “विघस' संज्ञक अवशिष्ट अन्नको युधिष्ठिर सबसे पीछे खाते थे
ब्राह्मणों के भोजन कर लेने पर और छोटे भाइयों को भी भोजन करा देने के बाद, ‘विघस’ कहलाने वाला जो शेष अन्न रहता, उसे युधिष्ठिर सबसे पीछे खाते थे।
वैशम्पायन उवाच