Sūrya-stava: Dhaumya’s Counsel and the Aṣṭaśata-nāma of Sūrya
सप्तम्यामथवा षष्ठ्यां भक््त्या पूजां करोति यः । अनिर्विण्णो5नहंकारी त॑ लक्ष्मीर्भजते नरम्,जो सप्तमी अथवा षष्ठीको खेद और अहंकारसे रहित हो भक्तिभावसे आपकी पूजा करता है, उस मनुष्यको लक्ष्मी प्राप्त होती है
saptamyām athavā ṣaṣṭhyāṁ bhaktyā pūjāṁ karoti yaḥ | anirviṇṇo 'nahaṅkārī taṁ lakṣmīr bhajate naram ||
युधिष्ठिर बोले—जो षष्ठी अथवा सप्तमी को भक्तिभाव से, खेद से रहित और अहंकार से दूर रहकर आपकी पूजा करता है, उस मनुष्य को लक्ष्मी प्राप्त होती है।
युधिछिर उवाच