Sūrya-stava: Dhaumya’s Counsel and the Aṣṭaśata-nāma of Sūrya
त्वामुपस्थाय काले तु ब्राह्मणा वेदपारगा: । स्वशाखाविहितैर्मन्त्रैरर्चन्त्यषिगणार्चितम्,सूर्ययेव!! आप ऋषिगणोंद्वारा पूजित हैं। वेदके तत्त्वज्ञ ब्राह्मणलोग अपनी-अपनी वेदशाखाओंमें वर्णित मन्त्रोंद्रारा उचित समयपर उपस्थान करके आपका पूजन किया करते हैं
आप ऋषिगणों द्वारा पूजित हैं। वेद के पारंगत ब्राह्मण उचित समय पर उपस्थान करके, अपनी-अपनी वेदशाखाओं में विहित मन्त्रों द्वारा आपका अर्चन करते हैं।
युधिछिर उवाच