Kuntī–Sūrya-saṃvāda: Autonomy, Reputation, and the Promise of Karṇa
नहि ते विक्रमे तुल्य: साक्षादपि शतक्रतुः । असबृद्धि त्वया सेन्द्रास्त्रासितास्त्रिदशा युधि,'साक्षात् इन्द्र भी पराक्रममें आपकी समानता नहीं कर सकते। आपने अनेक बार युद्धमें इन्द्रसहित संपूर्ण देवताओंको भयभीत (एवं पराजित) किया है”
nahi te vikrame tulyaḥ sākṣād api śatakratuḥ | asabṛddhi tvayā sendrās trāsitās tridāśā yudhi ||
पराक्रम में तुम्हारे समान साक्षात् शतक्रतु (इन्द्र) भी नहीं हैं। तुमने युद्ध में अनेक बार इन्द्र सहित समस्त देवताओं को भयभीत किया है।
मार्कण्डेय उवाच