कुन्ती द्वारा ब्राह्मण-सेवा
Kuntī’s Regulated Hospitality to a Brāhmaṇa Guest
य इदं दारुणाकारं न जानीषे महा भयम् । एष तीरत्त्वार्णवं राम: सेतुना हरिभि: सह,“हमलोगोंपर जो यह अत्यन्त दारुण एवं महान् भय उपस्थित हुआ है, इसका तुम्हें पता ही नहीं है। यह राम सेतुद्वारा समुद्रको लाँधघकर हमलोगोंकी अवहेलना करके वानरोंके साथ यहाँ आ पहुँचा है और राक्षसोंका महासंहार कर रहा है। मैंने इसकी पत्नी जनककुमारी सीताका अपहरण किया था
ya idaṃ dāruṇākāraṃ na jānīṣe mahābhayam | eṣa tīrtvā arṇavaṃ rāmaḥ setunā haribhiḥ saha |
तुम इस दारुण रूप वाले महान् भय को अभी जानते ही नहीं। यह राम वानरों के साथ सेतु के द्वारा समुद्र को पार करके यहाँ आ पहुँचा है।
मार्कण्डेय उवाच