Sūrya’s Counsel to Karṇa on Indra’s Intended Request
Kuṇḍala–Kavaca Discourse
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि रामोपाख्यानपर्वणि हनुमत्प्रत्यागमने द्रयशीत्यधिकद्धिशततमो< ध्याय:,इस प्रकार श्रीमह्याभारत वनपर्वके अन्तर्गत रामोपाख्यानपर्वमें हनुमान्जीके लंकासे लौटनेसे सम्बन्ध रखनेवाला दो सौ बयासीवाँ अध्याय पूरा हुआ
iti śrīmahābhārate vanaparvaṇi rāmopākhyānaparvaṇi hanumatpratyāgamane dvy-aśīty-adhika-dviśatatamo 'dhyāyaḥ |
इस प्रकार श्रीमहाभारत के वनपर्व के अन्तर्गत रामोपाख्यानपर्व में हनुमानजी के लंका से लौटने से सम्बन्ध रखने वाला दो सौ बयासीवाँ अध्याय समाप्त हुआ।
मार्कण्डेय उवाच