Sāvitrī-Upākhyāna: Dyumatsena’s Restoration and the Return to Kāmyaka
Conclusion
योडसौ कुलाधमो मूढो मया राज्येडभिषेचित: । सर्ववानरगोपुच्छा यमृक्षाश्न॒ भजन्ति वै,“उस वानरकुलकलंक मूर्खको मैंने ही राज्यपर अभिषिक्त किया है। इसके कारण सम्पूर्ण वानर, लंगूर तथा रीछ उसकी सेवा करते हैं
yo 'sau kulādhamaḥ mūḍho mayā rājye 'bhiṣecitaḥ | sarva-vānara-gopucchā yam-ṛkṣāś ca bhajanti vai ||
“वह मूढ़—कुलाधम—मेरे ही द्वारा राज्य पर अभिषिक्त किया गया था; और उसी अभिषेक के कारण समस्त वानर, लंगूर तथा रीछ सचमुच उसकी सेवा करते हैं।”
मार्कण्डेय उवाच