अरण्यकपर्व — मार्कण्डेयकथिते रामविजयः, सीताशुद्धिः, अयोध्याप्रत्यागमनवर्णनम्
Rāma’s victory, Sītā’s vindication, and return to Ayodhyā as told by Mārkaṇḍeya
पुलस्त्यो नाम तस्यासीन्मानसो दयित: सुतः । तस्य वैश्रवणो नाम गवि पुत्रो5भवत् प्रभु:,ब्रह्माजीके एक परम प्रिय मानसपुत्र पुलस्त्यजी थे। उनसे उनकी गौ नामकी पत्नीके गर्भसे वैश्रवण नामक शक्तिशाली पुत्र उत्पन्न हुआ
Pulastyo nāma tasyāsīn mānaso dayitaḥ sutaḥ | tasya Vaiśravaṇo nāma gavi putro 'bhavat prabhuḥ ||
उनके एक परम प्रिय मानसपुत्र पुलस्त्य नाम से थे। पुलस्त्य से उनकी गौ नामक पत्नी के गर्भ से वैश्रवण नाम का शक्तिशाली पुत्र उत्पन्न हुआ।
मार्कण्डेय उवाच