रावण–मारीचसंवादः तथा मृगप्रलोभनपूर्वकं सीताहरणोपक्रमः
Rāvaṇa–Mārīca Dialogue and the Decoy-Deer Prelude to Sītā’s Abduction
इत्युक्त्वा स मुनिर्वाक्यं देवदूतं विसृज्य तम् । शिलोज्छवृत्तिर्थर्मात्मा शममातिष्ठदुत्तमम्,ऐसा कहकर मुद्गल मुनिने उस देवदूतको विदा कर दिया और शिल एवं उज्छवृत्तिसे जीवन-निर्वाह करनेवाले वे धर्मात्मा महर्षि उत्तम रीतिसे शम-दम आदि नियमोंका पालन करने लगे
यह कहकर उस मुनि ने देवदूत को विदा कर दिया। शिलोञ्छवृत्ति से जीवन-निर्वाह करने वाले वे धर्मात्मा महर्षि उत्तम रीति से शम-दम आदि नियमों का आचरण करने लगे।
व्यास उवाच