असंतोष: परीतापो दृष्ट्वा दीप्ततरा: श्रिय: । यद् भवत्यवरे स्थाने स्थितानां तत् सुदुष्करम्,स्वर्गमें भी जो लोग नीचेके स्थानोंमें स्थित हैं, उन्हें अपनेसे ऊपरके लोकोंकी समुज्ज्वल श्रीसम्पत्ति देखकर जो असंतोष और संताप होता है, उसका वर्णन करना अत्यन्त कठिन है
स्वर्ग में भी जो लोग नीचे के स्थानों में स्थित हैं, उन्हें अपने से ऊपर के लोकों की समुज्ज्वल श्री-सम्पत्ति देखकर जो असंतोष और संताप होता है, उसका वर्णन करना अत्यन्त कठिन है।
देवदूत उवाच