सोअत्र दोषो मम मतस्तस्यान्ते पतनं च यत् | सुखबव्याप्तमनस्कानां पतनं यच्च मुदूगल,मुद्गल! स्वर्गमें सबसे बड़ा दोष मुझे यह जान पड़ता है कि कर्मोंका भोग समाप्त होनेपर एक दिन वहाँसे पतन हो ही जाता है। जिनका मन सुखभोगमें लगा हुआ है, उनको सहसा पतन कितना दुःखदायी होता है
मुद्गल! स्वर्ग का सबसे बड़ा दोष मुझे यही प्रतीत होता है कि कर्मफल का भोग समाप्त होने पर अंततः वहाँ से पतन अवश्य होता है। जिनका मन सुखभोग में रमा रहता है, उनका वह पतन कितना दुःखद होता है।
देवदूत उवाच