Rāma’s Abhiṣeka Plan, Kaikeyī’s Boon, and the Initiation of the Exile
Mārkaṇḍeya’s Account
तच्छतान्यपि भुज्जन्ति ब्राह्मणानां मनीषिणाम् | मुनेस्त्यागविशुद्धया तु तदन्न॑ वृद्धिमृच्छति,इस प्रकार उसमें सैकड़ों मनीषी ब्राह्मण एक साथ भोजन कर लेते थे। मुद्गल मुनिके विशुद्ध त्यागके प्रभावसे वह अन्न निश्चय ही बढ़ जाता था
tacchatāny api bhuñjanti brāhmaṇānāṃ manīṣiṇām | munes tyāga-viśuddhayā tu tad annaṃ vṛddhim ṛcchati |
उस अन्न में से सैकड़ों मनीषी ब्राह्मण एक साथ भोजन कर लेते थे; परंतु मुनि मुद्गल के विशुद्ध त्याग के प्रभाव से वह अन्न निश्चय ही बढ़ जाता था।
व्यास उवाच