जयद्रथविमोचन–पलायनवृत्तान्तः
Recovery of Draupadī and Jayadratha’s flight
4. ५ ढ़ है५ $ 2 ऐ कक प 282 श् पे | हट | गा २, | ५ + $ 7 यन्न भीष्मान्न च द्रोणान्न कृपान्न च बाह्नविकात् | प्राप्तवानस्मि भद्ठं ते त्वत्त: प्राप्त मया हि तत्,तत्पश्चात् उसने कर्णसे कहा--“वीरवर! तुम्हारा कल्याण हो। मुझे भीष्मजीसे, आचार्य द्रोणसे, कृपाचार्यसे तथा बाह्लिकसे भी जो वस्तु नहीं मिली थी, वह तुमसे प्राप्त हो गयी
vaiśampāyana uvāca | yanna bhīṣmānna ca droṇānna kṛpānna ca bāhlikāt | prāptavān asmi bhadraṃ te tvattaḥ prāptaṃ mayā hi tat ||
तत्पश्चात् उसने कर्ण से कहा—“वीरवर! तुम्हारा कल्याण हो। जो वस्तु मुझे भीष्म से, आचार्य द्रोण से, कृपाचार्य से और बाह्लिक से भी नहीं मिली थी, वही मुझे तुमसे प्राप्त हो गई है।”
वैशम्पायन उवाच