Draupadī-apaharaṇa-saṃdeśaḥ
Report of Draupadī’s Abduction and the Pāṇḍavas’ Pursuit
व्यपेता भ्रघने काले द्यौरिवाव्यक्तशारदी । शत छत्र, पताका, शुभ चँवर, रथ, हाथी और पैदल योद्धाओंसे भरी हुई वह कौरव- सेना शरत्कालमें कुछ-कुछ व्यक्त शारदीय सुषमासे सुशोभित आकाशकी भाँति शोभा पा रही थी
vyapetā bhraghane kāle dyaur ivāvyaktaśāradī | śata-chatra-patākā-śubha-cāmara-ratha-hastī-padāti-yoddhaiḥ pūrṇā sā kaurava-senā śaratkāle kiñcid-kiñcid vyakta-śāradīya-suṣamā-yuktā dyām iva śobhāṃ prāpa |
वैशम्पायन बोले—जब घने अन्धकार का काल बीत गया, तब वह कौरव-सेना—सैकड़ों छत्रों, पताकाओं, शुभ चँवरों, रथों, हाथियों और पदातियों से परिपूर्ण—शरत्काल में वैसे ही शोभित हुई, जैसे शारदीय आकाश धीरे-धीरे निर्मल होकर उज्ज्वल हो उठता है।
वैशम्पायन उवाच