कामीकवने द्रौपदी-दर्शनम्
Draupadī Observed at the Kāmyaka Hermitage
उपप्लुतं यथा सोम॑ राहुणा रात्रिसंक्षये । राजा दुर्योधन अग्निके समान उद्दीप्त होनेवाले (सोनेके) पलंगपर बैठा हुआ था। रात्रिके अन्तमें चन्द्रमापर राहुद्वारा ग्रहण लग जानेपर जैसे उसकी शोभा नष्ट हो जाती है, वही दशा उस समय दुर्योधनकी भी थी
upaplutam yathā somaḥ rāhuṇā rātrisaṃkṣaye | rājā duryodhanaḥ agnike samāna uddīptaḥ (suvarṇasya) palyaṅke upaviṣṭa āsīt | rātrau ante rāhuṇā candramasi grahaṇe jāte yathā tasya śobhā naśyati, tathā tasmin kāle duryodhanasyāpi daśā āsīt |
दुर्योधन अग्नि के समान उद्दीप्त स्वर्ण-शय्या पर बैठा था; परंतु रात्रि के अंत में राहु द्वारा चन्द्रमा ग्रस्त हो जाने पर जैसे उसकी शोभा नष्ट हो जाती है, वैसी ही दशा उस समय दुर्योधन की भी थी।
वैशम्पायन उवाच