मुद्गलोपाख्यानम् — व्रीहिद्रोणदानं, दुर्वाससः परीक्षा, स्वर्गगुणप्रश्नः
Mudgala Episode: Rice-measure Charity, Durvāsas’ Test, Inquiry on Heaven
ते कीर्यमाणा: खगमा: शरवर्षै: समन्तत: । न शेकुः पाण्डुपुत्राणां समीपे परिवर्तितुम्,सब ओरसे बाणोंकी वर्षाका लक्ष्य होनेके कारण वे आकाशचारी गन्धर्व पाण्डवोंके समीप जानेका साहस न कर सके
te kīryamāṇāḥ khagamāḥ śaravarṣaiḥ samantataḥ | na śekuḥ pāṇḍuputrāṇāṃ samīpe parivartitum ||
सब ओर से बाणों की वर्षा का लक्ष्य होने के कारण वे आकाशचारी गन्धर्व पाण्डुपुत्रों के समीप घूमने या पास आने का साहस न कर सके।
वैशम्पायन उवाच