यथा कर्णस्य च रथो धार्तराष्ट्रस्य चो भयो: । गन्धर्व: शतशश्खछिन्नौ तथा तेषां प्रचक्रिरे,गन्धरवोने जैसे कर्ण तथा दुर्योधन दोनोंके रथोंको छिन्न-भिन्न करके उनके सैकड़ों टुकड़े कर दिये थे, उसी प्रकार वे पाण्डवोंके रथोंको भी टूक-टूक कर देनेकी चेष्टामें लग गये
जैसे गन्धर्वों ने कर्ण और धृतराष्ट्रपुत्र (दुर्योधन) — दोनों के रथों को काट-फाड़कर सैकड़ों टुकड़ों में कर दिया था, वैसे ही वे पाण्डवों के रथों को भी टुकड़े-टुकड़े करने की चेष्टा करने लगे।
वैशम्पायन उवाच