Bhīṣma’s Admonition; Duryodhana’s Rājasūya Aspiration and the Proposal of a Vaiṣṇava-satra
भारत! तदनन्तर दुर्योधनने अपने सहस्रों सेवकोंको आज्ञा दी--'तुमलोग बहुत-से क्रीडामण्डप तैयार करो” ।। ते तथेत्येव कौरव्यमुक्त्वा वचनकारिण: । चिकीर्षन्तस्तदा55क्रीडाञ्जम्मुर्दतवनं सर:,आज्ञाकारी सेवक दुर्योधनसे “तथास्तु'” कहकर क्रीडाभवन बनानेकी इच्छासे द्वैतवनके सरोवरके निकट गये
vaiśampāyana uvāca | te tathety eva kauravya-muktvā vacana-kāriṇaḥ | cikīrṣantas tadā krīḍān jagmur dvaitavanaṁ saraḥ ||
वैशम्पायन बोले—तदनन्तर दुर्योधन ने अपने सहस्रों सेवकों को आज्ञा दी—“बहुत-से क्रीडामण्डप तैयार करो।” वे आज्ञाकारी सेवक “तथास्तु” कहकर, क्रीड़ा-सज्जा करने की इच्छा से, द्वैतवन के सरोवर के निकट चले गए।
वैशम्पायन उवाच