Daitya-āśvāsana of Duryodhana; Karṇa’s assurance and the mobilization of the Kaurava host
अन्य पाण्डव भी धर्मपर ही चलनेवाले हैं; अतः वे सब-के-सब युधिष्ठिरका ही अनुसरण करते हैं। कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर हमलोगोंपर कदापि क्रोध नहीं करेंगे ।। मृगयां चैव नो गन्तुमिच्छा संवर्तते भृशम् । स्मारणं तु चिकीर्षामो न तु पाण्डवदर्शनम्,हमारी विशेष इच्छा केवल हिंसक पशुओंका शिकार खेलनेकी है। हमलोग वहाँ स्मरणके लिये केवल गौओंकी गणना करना चाहते हैं। पाण्डवोंसे मिलनेकी हमारी इच्छा बिलकुल नहीं है
anye pāṇḍavā api dharmapareṇaiva vartante; ataḥ te sarve yudhiṣṭhiram eva anusaranti. kuntīnandanaḥ yudhiṣṭhiraḥ asmāsu kadācid api krodhaṃ na kariṣyati. mṛgayāṃ caiva no gantum icchā saṃvartate bhṛśam. smāraṇaṃ tu cikīrṣāmo na tu pāṇḍavadarśanam.
धृतराष्ट्र बोले—अन्य पाण्डव भी धर्मपरायण हैं, इसलिए वे सब युधिष्ठिर का ही अनुसरण करते हैं। कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर हम पर कभी क्रोध नहीं करेंगे। हमारी प्रबल इच्छा तो केवल मृगया के लिए जाने की है; हम स्मारण-रूप गणना (निरीक्षण का बहाना) करना चाहते हैं, पाण्डवों का दर्शन नहीं।
धृतराष्ट उवाच