वनप्रस्थानम् (Departure for the Forest) — Āraṇyaka-parva, Adhyāya 24
करेणुयूथै: सह यूथपानां मदोत्कटानामचलप्रभाणाम् | महान्ति यूथानि महाद्विपानां तस्मिन् वने राष्ट्रपतिर्ददर्श,राष्ट्रपति युधिष्ठिरको उस वनमें पर्वतोंके समान प्रतीत होनेवाले मदोन्मत्त गजराजोंके, जो एक-एक यूथके अधिपति थे, हथिनियोंके साथ विचरनेवाले कितने ही भारी-भारी झुंड दिखायी दिये
kareṇuyūthaiḥ saha yūthapānāṁ madotkaṭānām acalaprabhāṇām | mahānti yūthāni mahādvipānāṁ tasmin vane rājapatis dadarśa ||
उस वन में राजा युधिष्ठिर ने हथिनियों के साथ विचरते, पर्वतों के समान अचल प्रतीत होनेवाले, मदोन्मत्त यूथपतियों सहित महागजों के अनेक विशाल झुंड देखे।
वैशम्पायन उवाच