दुर्योधनस्य प्रायोपवेशः — शकुनिसान्त्वनम् तथा कृत्याह्वानम्
Duryodhana’s Fast: Śakuni’s Consolation and the Summoning of a Kṛtyā
घोषा द्वैतवने सर्वे त्वत्प्रतीक्षा नराधिप । घोषयात्रापदेशेन गमिष्यामो न संशय:,“नरेश्वरर गौओंके रहनेके सभी स्थान इस समय द्वैतवनमें ही हैं और वहाँ तुम्हारे पधारनेकी सदा प्रतीक्षा की जाती है; अतः घोषयात्राके बहाने हम वहाँ निःसंदेह चल सकेंगे”
ghoṣā dvaitavane sarve tvatpratīkṣā narādhipa | ghoṣayātrāpadeśena gamiṣyāmo na saṁśayaḥ ||
नराधिप! गौओं के सभी गोशाले इस समय द्वैतवन में ही हैं और वहाँ तुम्हारे आगमन की सदा प्रतीक्षा रहती है; अतः घोषयात्रा के बहाने हम निःसंदेह वहाँ जा सकेंगे।
वैशम्पायन उवाच