दुर्योधनस्य हास्तिनपुरप्रवेशः
Duryodhana’s Return toward Hastinapura; Karṇa’s Consolation
हि आय न [हुक हि 7 आम पज्चत्रिशर्दाधिकद्विशततमो< ध्याय: सत्यभामाका द्रौपदीको आश्वासन देकर श्रीकृष्णके साथ द्वारकाको प्रस्थान वैशम्पायन उवाच मार्कण्डेयादिभिरवविंप्रै: पाण्डवैश्व महात्मभि: । कथाभिरनुकूलाभि: सह स्थित्वा जनार्दन:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! उस समय भगवान् श्रीकृष्ण मार्कण्डेय आदि ब्रह्मर्षियों तथा महात्मा पाण्डवोंके साथ अनुकूल बातें करते हुए कुछ कालतक वहाँ रहकर (द्वारका जानेको उद्यत हुए)
Vaiśampāyana uvāca: Mārkaṇḍeyādibhir brahmarṣibhiḥ pāṇḍavaiś ca mahātmabhiḥ | kathābhir anukūlābhiḥ saha sthitvā janārdanaḥ ||
वैशम्पायन बोले—जनमेजय! उस समय भगवान् जनार्दन (श्रीकृष्ण) मार्कण्डेय आदि ब्रह्मर्षियों तथा महात्मा पाण्डवों के साथ अनुकूल और आश्वासक बातें करते हुए कुछ काल तक वहाँ ठहरे।
वैशम्पायन उवाच